
करमां री खेती
करमां री खेती
Wednesday, 28 March 2012

म्हैं तो
(1)
फण, सूंड, पंजा सा सबळा
गायां सा अबळा
चारपाया का घिसीजणिया
रैवै, आभै हेठै भेळा
पण, म्हैं तो..........
(2)
काळजौ चढ़ावती
कूकां रै बिचाळै
बणतां रैवै, अेक दूजै रा
सिराण-दुपारा।
पण ओळमौ नीं
बदळै री ओळी नीं
पण, म्हैं तो..........
(3)
ऊंचै-ऊंचै दिरखतां
अेक न्यारौ बंगलौ बणाय
भूख, तिरस, गरमी, सरदी अर पीड़
काढै
पाँख्यां, चूंच अर पंजां रै सायरै
पण, म्हैं तो..........
(4)
कळ-कळ बैवणिया झरनां सूं
चिणसाक अळगा
ऊग्योड़ा बिरछ
भुजावां पसार’र
रैवणियां ने खेलावै
बांदरां रौ खेल
पण, म्हैं तो..........
फण, सूंड, पंजा सा सबळा
गायां सा अबळा
चारपाया का घिसीजणिया
रैवै, आभै हेठै भेळा
पण, म्हैं तो..........
(2)
काळजौ चढ़ावती
कूकां रै बिचाळै
बणतां रैवै, अेक दूजै रा
सिराण-दुपारा।
पण ओळमौ नीं
बदळै री ओळी नीं
पण, म्हैं तो..........
(3)
ऊंचै-ऊंचै दिरखतां
अेक न्यारौ बंगलौ बणाय
भूख, तिरस, गरमी, सरदी अर पीड़
काढै
पाँख्यां, चूंच अर पंजां रै सायरै
पण, म्हैं तो..........
(4)
कळ-कळ बैवणिया झरनां सूं
चिणसाक अळगा
ऊग्योड़ा बिरछ
भुजावां पसार’र
रैवणियां ने खेलावै
बांदरां रौ खेल
पण, म्हैं तो..........
Tuesday, 27 March 2012

सांच हुंवतौ दीसै है
घाट-घाट मुळकासी साहित
मोकळौ करसी चानणौ।
मुरधर थारौ मान बधैला
ओळी पड़सी मानणौ।
सींच्यौ इण नै मान बधावण
दिवाकर-देथा जैड़ा लोग।
ठावी ठौड़ दिरावण सारू
बणग्या जोगी छोड्या भोग।
‘राजस्थानी’ थारौ आसण
कितरां दसकां सूं तरसै है।
मुरलीधर पाळ्यौ बौ सुपणौ
अब सांच हुवतौ दीसै है।
आठवीं सूची में भिळणौ
क्रोड़ काळजा हरखावै।
सनमाण बधण री आस पळी
मोत्यां ज्यूं मुरधर पळकावै।
मोत्यां ज्यूं पळ-पळ ओ मुरधर
मरूवाणी रौ मान बधावैला।
‘ढोला मरवण’ वाळौ म्हारौ देस
नित जग मां पूज्यौ ज्यावैला।
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