अंगद
(1)
अेक बगत
रामजी रै कैयां सूं
बाली रौ बेटौ
ऊभौ, पग रोप’र
‘दस माथा’ आळै सामौ
पण, बौ कोनी सरकाय सक्यौ
अंगद रौ पग
चिणसोक।
(2)
आज सागी रावण
नूंवा माथा लगाय
ऊभौ है,
आपरौ पग रोप’र।
पण, अंगद नीं हिलाय पाय रह्यौ
उण रौ पग,
चिणसोक।
(1)
अेक बगत
रामजी रै कैयां सूं
बाली रौ बेटौ
ऊभौ, पग रोप’र
‘दस माथा’ आळै सामौ
पण, बौ कोनी सरकाय सक्यौ
अंगद रौ पग
चिणसोक।
(2)
आज सागी रावण
नूंवा माथा लगाय
ऊभौ है,
आपरौ पग रोप’र।
पण, अंगद नीं हिलाय पाय रह्यौ
उण रौ पग,
चिणसोक।
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