
सांच हुंवतौ दीसै है
घाट-घाट मुळकासी साहित
मोकळौ करसी चानणौ।
मुरधर थारौ मान बधैला
ओळी पड़सी मानणौ।
सींच्यौ इण नै मान बधावण
दिवाकर-देथा जैड़ा लोग।
ठावी ठौड़ दिरावण सारू
बणग्या जोगी छोड्या भोग।
‘राजस्थानी’ थारौ आसण
कितरां दसकां सूं तरसै है।
मुरलीधर पाळ्यौ बौ सुपणौ
अब सांच हुवतौ दीसै है।
आठवीं सूची में भिळणौ
क्रोड़ काळजा हरखावै।
सनमाण बधण री आस पळी
मोत्यां ज्यूं मुरधर पळकावै।
मोत्यां ज्यूं पळ-पळ ओ मुरधर
मरूवाणी रौ मान बधावैला।
‘ढोला मरवण’ वाळौ म्हारौ देस
नित जग मां पूज्यौ ज्यावैला।
No comments:
Post a Comment