करमां री खेती

करमां री खेती

Wednesday, 28 March 2012



दरद

दरद जे पीड़ व्है
तो ओ साधक भी व्है।
साध्य भी व्है।
रगां मांय
दौड़तौ दरद
कैय जावै सै बात्यां
बिना कैया
अर रच ज्यावै
अेक सबदलोक।
जिणरा ऊंडा
अरथ व्है
मीलां दूर
कोरी कळपनावां सूं।
उणा में व्है अेक टीस
अर टीस मांय भी व्है
अेक मजौ।
अेक सुकून।
जकौ आत्मा ने दिरावै
सांति।
जकी कर ज्यावै
काळजै रौ बोझौ हळ्कौ।

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