करमां री खेती
करमां री खेती
Tuesday, 27 March 2012
बगत
घोर सरणाटे मांय पड़ी
उण री लास
उडीकै
पंचभूतां सूं मिलण सारू।
पण
स्यात उणरौ कोई कोनी
जिणसूं कर सकै
उण री काया अरदास।
उण रै कांनी उठण वाळी
हर अेक संवेदना
क्षण भर री है।
अरे भाई
बखत किण रै कनै है ?
हाँ,
चीलखां, कागला अर कुता
जरूर करसी
उण रौ भक्षण।
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